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राष्ट्रपति ने की महिला आरक्षण विधेयक पास करने की वकालत

women reservation bill President of India

राज्यों की महिला विधायकों एवं विधान पार्षदों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि
 

  •  यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह विधयेक अब तक संसद में पारित नहीं हो सका है और इसे पारित कराना सभी राजनीतिक दलों का दायित्व है  
     
  •  26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और संविधान में कहा गया है कि सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं, जीवन के हर क्षेत्र में समानता का अधिकार है। महिलाओं के सशक्तिकरण को  हम प्रतिनिधित्व देकर ही आगे बढ़ा सकते हैं। 
     
  • भारत की आबादी का 50 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है लेकिन आज भी  संसद में  12 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं  हैं।
     
  • दो तिहाई बहुमत से एक सदन  (राज्यसभा) में  पारित होने के बाद भी महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं एवं परिषदों में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला विधेयक दूसरे सदन (लोकसभा) में पारित नहीं हो सका है। 
     
  •  महिलाओं का सशक्तिकरण और संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार के लिए यह जरूरी है। जब तक उन्हें आरक्षण नहीं दिया जायेगा, ऐसा नहीं हो सकेगा। 
     
  • राजनीतिक दल जो अपना प्रतिनिधि मनोनीत करते हैं, उन्हें इस दिशा में पहल करनी है। संसद की स्थायी समितियों में प्रतिनिधि मनोनीत करते समय इस पर ध्यान देना चाहिए।
     
  •  पंचायतों और स्थानीय निकायों में 12.70 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं और वे काफी अच्छा काम कर रहीं हैं। 
     
  •  कई राज्यों में पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है और कई राज्य इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। 
     
  •  महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व देने के संबंध में दुनिया के 190 देशों में भारत का 109वां स्थान है। 
     
  • संसद में केवल विधेयक ही पारित न हो बल्कि सौहार्दपूर्ण माहौल भी बने। 

 

 

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